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गुरुत्वाकर्षण बल और पाइथागोरस प्रमेय को विदेशियों से पहले भारतीय वैज्ञानिकों ने खोजा था, ये रहा सबूत

सोचिए अगर आपको कोई कहे कि पाइथागोरस प्रमेय यानी पाइथागोरस थ्योरम हमारे देश के ज्ञानियों द्वारा खोजा गया है, तो क्या आप इस बात पर विश्वास करेंगे? शायद आपका जवाब ना ही होगा और अगर आपको पूछा जाए कि गुरुत्वाकर्षण यानी कि ग्रेविटी की खोज किसने कि थी तो आप क्या कहेंगे। जाहिर सी बात है आपका जवाब न्यूटिन होगा। पर क्या हो अगर हम आपको कहें कि आपको बचपन से सिखाई और पढ़ाई जा रही ये दोनों चीजें हालत हैं।

जी हां, यह दोनो ही चीजें, पाइथागोरस थ्योरम और गुरुत्वाकर्षण पूरी दुनिया को ज्ञात से पहले ही हमारे देश में खोजे जा चुके थे पर हमारी शिक्षा नीति ही ऐसी है कि अंग्रेजों द्वारा चलाए और पढ़ाई गए विदेशी वैज्ञानिकों के गुणगान हमें आज तक पढ़ाई जाते हैं और हमारे देश के महान ज्ञानी ऋषि मुनियों द्वारा किए और खोजे गए महान चीजों के बारे में हमें किसी को पढ़ाया नहीं जाता और इसलिए हमें इसका पता ही नहीं है।

हम आज तक यही जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण की खोज तब हुई जब न्यूटन एक सेब के पेड़ के नीचे बैठे थे और तभी उन पर एक सेब गिरा जिसके बाद उनके मन में इस जिज्ञासा उठी कि यह सब ऊपर क्यों नहीं गया और नीचे ही क्यों गिरा और इसी जिज्ञासा के चलते उन्होंने गुरुत्वाकर्षण बल की खोज कर डाली पर यह सरासर हालत है। असल में यह दुनिया को दी गई भारत की देन है। भारत के महान गणितज्ञ भास्कराचार्य ने इसकी खोज की थी और विश्व में सर्वप्रथम उन्हें ही इसके बारे में ज्ञात हुआ था। उन्होंने इसके बारे में अपने ग्रंथ सिद्धांत शिरोमणि में जिक्र भी किया है जिसमें उन्होंने लिखा है कि कैसे पृथ्वी अपने विशिष्ट बल की वजह से सभी चीजों को अपनी ओर आकर्षित करता है और इसी गुरुत्वाकर्षण बल के बारे में उन्होंने विस्तार पूर्वक लिखा है।

ऐसे ही पाइथागोरस थ्योरम भी हमें आज तक पढ़ाया गया है कि पाइथागोरस की खोज है पर असल में ये ऋषि बौधायन की देन। पाइथागोरस द्वारा इस थ्योरम की खोज होने के 250 साल पहले ऋषि बौधायन ने यह खोज कर दी थी। उन्होंने उनकी लिखी हुई पुस्तक शुल्ब सूत्र में इसका जिक्र किया है और इससे संबंधित सभी नियम और फॉर्मूला भी उसी किताब में बताए गए हैं।

उम्मीद है हमें पढ़ाया जा रहा यह पाठ्यक्रम बदले हो और जल्द ही हमारे आने वाली पीढ़ी को हमारे देश के महान वैज्ञानिकों और उनके लिए गए खोज और उनके द्वारा दिए गए उच्च कोटि के ज्ञान के बारे में पढ़ाया जाए ताकि वो इससे अज्ञान ना रह कर दूसरे देशों का गुणगान करना बंद करें और हमारे देश की महानता को जानें।

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